अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से वापस लिया जाएगा अल्पसंख्यक दर्जा! यहां जानिए पूरा मामला

संजय शर्मा

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Uttar Pradesh News : अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी(AMU) के अल्पसंख्यक दर्ज पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. कोर्ट में जिरह इस विषय पर है कि इस यूनिवर्सिटी का स्टेट्स अल्पसंख्यक है या नहीं. अल्पसंख्यक दर्ज के पक्ष में याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर वकील राजीव धवन ने चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ वाली पीठ के सामने दलील पेश की.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए केंद्र सरकार ने अपनी रखी. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान देते हुए कहा गई कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने का कोई अर्थ नहीं है.

केंद्र सरकार का है ये रूख

सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल करते हुए मौजूदा एनडीए सरकार ने दस साल पहले की UPA सरकार के विपरीत रुख दिखाया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए दाखिल की गई अपनी दलील में केंद्र सरकार ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक का टैग न दिया जाए. ऐसा इसलिए क्योंकि AMU का राष्ट्रीय चरित्र है. AMU किसी विशेष धर्म का विश्वविद्यालय नहीं हो सकता. क्योंकि यह हमेशा से राष्ट्रीय महत्व का विश्वविद्यालय रहा है. केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अपने “राष्ट्रीय चरित्र” को देखते हुए, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक संस्थान नहीं हो सकता है. यह किसी विशेष धर्म का संस्थान नहीं हो सकता है.

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क्या है पूरा विवाद

बता दें कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 30(1) में सभी धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान खोलने और चलाने का अधिकार दिया गया है. ये प्रावधान सरकार की तरफ से अल्पसंख्यक समुदायों के विकास को बढ़ावा देने के लिए किए गए हैं. इससे उन्हें शैक्षिक संस्थान या विश्वविद्यालय चलाने की स्वतंत्रता मिलती है. गौरतलब है कि 2006 में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कुल 8 याचिकाएं दाखिल हुईं जिनमें एक याचिका केंद्र सरकार की तरफ से है। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह की अगुआई में यूपीए की सरकार थी. हालांकि, 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी की सरकार आने के बाद एएमयू को लेकर केंद्र के रुख में बड़ा बदलाव आया। 2016 में नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह केंद्र की तरफ से दायर अपील वापस ले रही है

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सात जजों की बेंच कर रही है सुनवाई

केंद्र की ओर से भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह लिखित दलील सुप्रीम कोर्ट के 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष दी है. पीठ ने अल्पसंख्यक दर्जे के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) की याचिका पर सोमवार से सुनवाई शुरू की है. संविधान पीठ में सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा हैं. गौरतलब है कि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी किसी भी शिक्षण संस्थान को अल्पसंख्यक दायरे में सीमित रखने की बजाय सबके लिए खुला रखने की बात कही थी.

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